आयुर्वेद  में  स्पष्ट  लिखा  हुआ  हं  की  जनम  जनमात्रम  किये  गए  पापीओ  को  जब  इस  सरीरक  और  मानसिक  में  व्याधि  के  रूप  में  और  कोई  ौसढ़  काम  नहीं  करती  और  दिल  और  दिमाग  भी  साथ  नहीं  देता  तोह  आदमी  व्याधियोंसे  परेशान  होजाता  हैं  कोई  भी  ौसढ़  काम  नहीं  करती  अपना  मानसिक  संतुलन  खो  देता  हं  जिसके  गृह  कलेश  व्यापर  रोज़गार  न  जाने  कितनी  संसाए  जीवन  में  आजाती  हं  पर  वोह  व्यक्ति  हताश  और  निराश  होजाता  हम  तोह  वह  ज्योतिष  सत्र  हस्त  रेखा  विज्ञानं , अंक   विज्ञानं , वास्तु  सत्र , कुण्डलिनी  ज्ञान , गृह  दोष ) और  विभाजन  प्रकार  के  उपायों  से  उनको  पापो  का  परिश्चित  करके  ही  हम  अपने  इस  मानव  जीवन  को  सवस्थ  समृद्ध  और  खुशाल  बना  सकते  हं . बस  शर्त  हं  की  हमे  वैदिक  ज्योतिष  सस्त्र  वराहमिहिर  इतियादी  के  ग्रंथो  का  हुए  पूर्णतः  ज्ञान  होना  चाहिए  न  की  लाल  कित्ताब  जैसी  ांध  विश्वास  पुराण  पुस्तकों  से  उनका  निराकरण  नहीं  किया  जा  सकता  हं , एवं  को  सफल  और  समृद्ध  बनाना  के  लिए  हम  सचदं  वेश  धरी   धना  लोडः  अज्ञानी  और  विभान  प्रकार  के  आडंबरो  से  बचते  हुए  सही  ज्योतिष  ज्ञान  के  द्वारा  इन्  पूर्व  करम  पापो  का  परेशित  करना  चाहिए  और  वेद   इतियादी  का  अध्ययन  करके  हमे  अपने  इस  जीवन  को  अपने  नाविक  कर्मो  के  द्वारा  सुगम  बनाना  चाहिए  क्युकी  परिवार  ही  1 ब्रह्माण्ड  हैं  और  ब्रह्माण्ड  के  किसी  भी  ग्रह  दोष  का  निवारण  के  इसी  परिवार  सेम  ही  संभव  हैं  . जैसाकि  वेद  कहता  हैं   मातृमा , पितृमं , देवमन  महान  हैं. सभी  देवी  देवताओ  से  ऊपर  माता  पिता  को  मन  गया  हैं  और  उनकी  सेवा  से  ह्यूमेन  जीवन  की  सभी  समस्याओ  का  निदान  पा   सकता  हैं . अगर  आपको  सही  समय  पर  सही  कारन  बताया  जाये  तोह  कोई  भी  समस्या  का  संधान  ासभाव  नहीं .

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