आयुर्वेदा  वह शास्त्र  हैं   जिसमें  यह  बताया  जाये  की  आपके  शरीर  के  लिए  क्या  हितकर  हैं   क्या  अहितकर   हैं  क्या  सुखकर  हैं  क्या  दुखकर  हैं।

हिताहितं सुखं दुःखं आयुस्तस्य हिताहितम् ।

मानं च तच्च यत्रोक्तं आयुर्वेदः स उच्यते ॥

 इसमें  समस्त   व्यक्ति  के  स्वास्थय  की  रक्षा  की  जाती हैं  रोगी  को  रोग  से  मुक्त  करने  का  तरीका  समझाया   जाता  हैं  यानि  इसमें  २  तरह  की  चिकत्सा  होती  हैं  १  रसायन  चिक्तिसा  और  १  औषध  चिकित्सा  लेकिन  यह  सभी  चिकित्सा  तभी  सफल  होती  हैं  जब  आप  पर  परहेज  से  रहे 

यही कारण  हैं  तभी  मॉडर्न  साइंस  में  प्रत्येक रोग  को  ासाध्ये  बना  दिया  हैं  क्युकी  वोह  रोज़  के  कारण  को  दूर  करने  की  बात  नहीं  करते  और  न  ही  रोग  के  मूल कारण  को  जानते  हैं . आज  पूरा  चिकत्सा  सस्त्र  लाक्षणिक चिक्तिसा   apr काम  क्र रहा  हैं  जबकि  आयुर्वेदा  दोष  और  दृश्य  की  बात  करता  हैं , इसी  कारन  आज  परतेक  रोग  आसाध्य  होता  जा रहा हैं  आयुर्वेदा  में  औसध  निर्माण  में  ाओशध  निर्माता  वैद  खुद  होते  थे  जोह  रोज़  की  प्रकृति   को  जानकर  रोगी  के  बाल , देश , काल और  समेह  अनुसार  औषदि  का  निर्माण  करते  थे  और  वोह  औसधिया  भावो  से  भवित  होकर  रोगी  के  लिए  अमृत  का  कार्य   करते  थे  और  मृत  पाए  व्यक्ति  भी  जीवन  को प्राप्त  करता  था . आज  लाक्षणिक  चिक्तिसा  के कारण और  विभिन  प्रकार  के  स्टेरॉइड्स , एंटीबायोटिक्स , एनाल्जेसिक  and डिफ्लैमेन्टोर्य  का  प्रयोग  करके  साधारण  रोग  भी असाधारण  बनता  जा रहा  हैं  . निमोनिया, नजला,  एसिड गैस  के  प्रारंभिक  रोगी  आज  की  चिकित्सा  आज  के  चिकत्सा  द्वारा  इलाज़  करके  शुगर , हार्ट डिजीज, किडनी डैमेज,  ब्रेन  हमरागे, परलयज़े  इतियादी रोगो  का  रोगी  बनता  जा रहा  हैं   क्युकी  आज  निर्माता  अलग  हैं  ासोधि  को  देने  वाला  अलग  हैं  और  जबतक  निर्माता  और  औषधि दाता 1 नहीं  होंगे  तबतक  रोग  को  सहमरनाशत  नहीं  किया  जा  सकता  जैसा  की  चवण  परेश  से  चवण  ऋषि  बुढ़ापे  में  भी  युवा  होगये  थे  और   संतान  कोप  रैप्ट  किया . महाभारत  के  हुंती  पुत्र  भीम  रसायन  का  प्रयोग  करके  हज़ारो  हाथियों  का  बल  प्राप्त  किया  इसी  ान्तर  को  समझते  हुए  में  नदीविद्या  कायाकल्प  का  संस्थापक  वैद  सत्य  प्रकाश  आर्य   उन्ही  बारीकियों  को  समझते  हुए  नदी  विज्ञानं  के  द्वारा  रोग  का  परिक्षण  करके  सवनिर्मित  भावो  से  भवित  मंत्रो  से  अभिमंत्रित  आशोधियो  का  निर्माण  करके  ासाध्ये  रूपों  को  ठीक  करने  का  परियातन  क्र  रहा  हु . क्या  कारन  था  पूर्व  काल  में  आयुर्वेद  इतना  उन्नत  था  और  उसके  योग  नेचुरल  पाठ्य , ज्योतिष , पंचकर्मा , आयुर्वेदा  क्युकी  जबतक  इनका  आपस  में  इनका  समझस्या  नहीं  होगा  रोज़  को  समूल  नष्ट  नहीं   किया  जा  सकता  और  इस  वीडिया  को  हम  सर्कार  और  समाज  के  सहारे  नहीं  छोड़  सकते , इसलिए  हमने  संकल्प  लिया  हैं   की  यह  विद्याओ  का  लोप  ना  हो  और  परतेक  मानव  इसका  ज्ञान  प्राप्त  करे  और  मानव  जीवन  को  सवस्थ  और  सुखमें  बना  सके  इसलिए  हमने  इनको  छोटा  और  प्रभावित  ढंग  से  ऐसा  परियातन  किया  की  ाँ  पढ़  व्यक्ति  नहीं  इसके  सार  को  समझकर  के  अपने  जीवन  को  सवस्थ  रख  सके  और  विभिन  प्रकार  के  ांध  विश्वास  से  दूर  रहकर  मानव  का  कल्याण  करे .

इन  सबके  सरल  भाषा  में  थोड़े  समः  में  इनको  समझा  जा  सके  पाठ्यक्रम  बनाया  हैं   जो  आप  इ  क्लासेज  के  रूप  में  प्राप्त  क्र  सकते  हैं।

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